Sunday, 7 May 2017

शौक था!

शौक था
कभी साथ चलने का
दूर दूर तक नीरव आसमान
को तकते जाना
सड़कों का पाँवों के नीचे से फिसलते जाना
सिर्फ़ सड़कें ही क्यों
एक उम्र,एक एहसास,एक जज़्बात
सभी कुछ तो फिसल रहा था
हम नहीं थे अलहदा इन चीजों से
फिर भी एक गुमान पाल रखा था साथ चलने का
हम परेशान हाल,तुम हौसला थी
इस सफ़र में
हम जिम्मेदार और तुम बेपरवाह थी इस सफ़र में
हम चुप चुप तुम बातूनी थी
इस सफ़र में
हम नीरस तुम सेंस ऑफ ह्यूमर से भरी थी
इस सफ़र में
शौक था
जब कभी साथ चलने का
अब कहाँ सब कुछ अपने हाथ में होता है
न उम्र,न एहसास, न लम्हात
तुम चली गई एकदम से, पर
सबकुछ ख़त्म थोड़े होता है एक झटके में
यकीन से नहीं पर कह सकता हूँ तुम कुछ बदली बदली हो
शौक था
कभी साथ चलने का
सो हम नहीं बदले
ईयर फोन का एक सिरा ही कान में लगाता हूँ
दूर-दूर नीरव आकाश को निहारता हूँ
सड़कें आज भी पाँवों के नीचे से फिसली जा रहीं हैं, पर
शौक था
कभी साथ चलने का
तो
आज भी मैं जब सफ़र में होता हूँ
तुम्हारे साथ होता हूँ ।


यकीं नहीं होता

सुनो तुम आई! और चली भी गई
यकीं नहीं होता
कभी मेरे जगते ही वापस सुला देती थी तुम
और आज
सो रहा था इसलिए जगाया नहीं और वापस चली गई
यकीं नहीं होता

Saturday, 29 April 2017

काश ! तुम एडमिन होते

आओ सुनाते हैं वो पीड़ा जो सुनने और सुनाने वाले दोनों पर एहसान होगा । भई लगती है । आपको नहीं लगती किसी की बात । साब ऐसा कैसे हो सकता है, हाँ मानता हूं आप देर तक बर्दास्त कर लेते हो , पर साब लगती तो है । मित्र हैं जो उन्हें अमित्र कहूँ बुरा भी मान जाएंगे और मित्र धर्म का पालन भी न होगा । पर कह ही डालता हूँ आप अब प्यार से मजबूर जो किये जा रहे हैं कहने को । शौकिया कहिये या नैतिक ज्वार-भाटा का आलोड़न विलोड़न , हमने भी 'भगीरथ प्रयास' नाम से एक ग्रुप बना दिया और उद्देश्य निर्धारित हुआ बहुत मामूली सा कि इस समूह का उद्देश्य प्रश्न उत्तर या तथ्य के रूप में हिंदी का ज्ञान एक दूसरे तक पहुँचाना या आदान प्रदान कह लीजिए । अब समस्या यहीं से शुरू हुई एक बार में हमने उन 40 मित्रों को समूह से जोड़ दिया जो हम पर करम फरमाते थे । अब कुछ स्वागत भी किया । यूँ गाड़ी चल निकली । थोड़ा अनुशासन मेन्टेन हुआ कुछ नियम बने । अब समस्या ये हुई कि 20 दिन तक भी कुछ मित्रों ने सांस न ली । हमने सक्रिय सदस्यों के सुझाव पर उन्हें बाहर कर दिया । ये पहला निर्णय था जब हमने उन करीबियों जोर का झटका धीरे से दिया जो ख़ुद को हमारे प्यार का अधिकारी मान बैठे थे । झटका लगा तो कुछ की नींद टूटी, अब भई झटके से नींद टूटेगी तो समस्या तो उतपन्न होगी । हुई। लोगों ने ऐसी तोहमतें लगानी शुरू की कि जबाव क्या देता । हमने उत्तर में लिखा काश!आप एडमिन होते और में तोहमतें लगा पाता ।