Sunday, 7 May 2017

यकीं नहीं होता

सुनो तुम आई! और चली भी गई
यकीं नहीं होता
कभी मेरे जगते ही वापस सुला देती थी तुम
और आज
सो रहा था इसलिए जगाया नहीं और वापस चली गई
यकीं नहीं होता

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